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ख़राब मौसम में पाकिस्तान ने नहीं दी हवाई क्षेत्र प्रयोग की अनुमति : डीजीसीए

नई दिल्ली। भारत के नागरिक विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने शुक्रवार को एक बयान जारी करते हुए बताया कि इंडिगो एयरलाइंस की एक उड़ान को पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली, जबकि विमान खराब मौसम में भीषण एयर टर्बुलेंस का सामना कर रहा था। क्या है मामला? यह घटना 21 मई की है, जब दिल्ली से श्रीनगर जा रही इंडिगो फ्लाइट संख्या 6E-2142 ने पठानकोट के पास अचानक खराब मौसम का सामना किया। विमान में 227 यात्री सवार थे। खराब मौसम को देखते हुए पायलट ने लाहौर एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क कर पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का प्रयोग करने की अनुमति मांगी, लेकिन उसे स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया गया। श्रीनगर में सुरक्षित लैंडिंग डीजीसीए के अनुसार, पायलट और केबिन क्रू ने सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए खराब मौसम के बावजूद विमान को सुरक्षित श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतार दिया। हालांकि, विमान के आगे के हिस्से (नोज रेडोम) को नुकसान पहुंचा है, लेकिन किसी भी यात्री को कोई चोट नहीं आई है। डीजीसीए का बयान डीजीसीए ने इस घटना पर बयान जारी करते हुए कहा: “इंडिगो विमान 6E-2142 जब पठानकोट के पास उड़ान भर रहा था, उस समय उसे गंभीर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। चालक दल ने पास के एयरस्पेस से मदद मांगी लेकिन पाकिस्तान की ओर से अनुमति नहीं दी गई। विमान को सुरक्षित श्रीनगर उतार लिया गया और सभी यात्री सुरक्षित हैं।” क्या है ‘नोज रेडोम’ और क्यों हुआ नुकसान? नोज रेडोम (Nose Radome) विमान के अगले हिस्से पर स्थित एक कवच होता है, जो रेडार और नेविगेशन सिस्टम को सुरक्षित रखता है। तेज हवा, बर्फ़ या बिजली से इस हिस्से को नुकसान हो सकता है। DGCA के अनुसार, एयर टर्बुलेंस के कारण ही इस हिस्से में क्षति हुई। अंतरराष्ट्रीय नियमों का सवाल भारत के नागरिक उड्डयन विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता जताई है कि खराब मौसम जैसी आपात स्थिति में भी पाकिस्तान ने एयरस्पेस की अनुमति नहीं दी, जो कि इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) के ह्यूमेनिटेरियन सिद्धांतों के खिलाफ है। इंडिगो और डीजीसीए की अगली कार्रवाई इंडिगो ने घटना की जांच शुरू कर दी है और डीजीसीए ने तकनीकी निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। विमान के नोज रेडोम की मरम्मत की जा रही है और यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी गई। निष्कर्ष यह घटना ना सिर्फ एक तकनीकी चुनौती थी, बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों की मानवीय जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े हुए हैं। एयर टर्बुलेंस जैसी स्थितियों में सहयोग से इनकार करना आने वाले समय में राजनयिक मुद्दा बन सकता है।

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राहुल गांधी ने पूछा- ‘ट्रंप को भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने के लिए किसने कहा?’

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए चार दिवसीय संघर्ष और संघर्षविराम समझौते पर सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के एक इंटरव्यू को साझा करते हुए तीन तीखे सवाल दागे हैं। राहुल गांधी ने उठाए तीन सवाल राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसी वीडियो के साथ राहुल गांधी ने लिखा: क्या है मामला? बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए हमले के बाद भारत ने छह और सात मई की दरमियानी रात पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम से हवाई हमले किए। इसके बाद पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए सीमावर्ती इलाकों में गोलाबारी की और ड्रोन व मिसाइल हमले किए। इस संघर्ष के बीच 10 मई को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान जारी कर कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम समझौता हो गया है, और अमेरिका ने इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभाई। ट्रंप के बयान पर उठा विवाद राहुल गांधी ने सवाल खड़ा किया है कि भारत सरकार ने ट्रंप को इस संघर्ष में मध्यस्थता की भूमिका निभाने की अनुमति कब दी? यह सवाल इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि भारत हमेशा से कश्मीर और पाकिस्तान से जुड़े मामलों को द्विपक्षीय बताता रहा है, और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को खारिज करता रहा है। कूटनीतिक सवालों में फंसी सरकार राहुल गांधी के इन सवालों ने सरकार को कूटनीतिक और राजनीतिक रूप से कटघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्ष जानना चाहता है कि यदि भारत की तरफ से किसी औपचारिक सहमति के बिना अमेरिका ने मध्यस्थता की, तो सरकार ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं जताई? अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति पर भी उठे सवाल राहुल गांधी द्वारा पूछा गया यह सवाल भी अहम है कि पाकिस्तान की निंदा करने में कोई देश भारत के साथ क्यों नहीं आया? क्या भारत का अंतरराष्ट्रीय समर्थन कमजोर हुआ है? यह सवाल भारत की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति पर भी गहराई से सोचने को मजबूर करता है। क्या सरकार देगी जवाब? अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सरकार राहुल गांधी के इन सवालों का जवाब देगी, और यदि हां, तो क्या वह अमेरिका और ट्रंप के दावे को खारिज करेगी या उसे स्वीकार करेगी। फिलहाल इस मामले पर विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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अब नहीं बिकेगी ठेले की चाय-भजिया? दुकान लेना होगा अनिवार्य, प्रशासन की सख्ती से मचा हड़कंप

बिलासपुर, छत्तीसगढ़। शहर के सैकड़ों ठेले-खोमचे वालों की रोजी-रोटी पर संकट मंडराने लगा है। प्रशासन ने एक नया आदेश जारी कर सार्वजनिक स्थलों पर ठेले लगाने पर रोक लगा दी है। इसके तहत अब ठेले पर चाय, भजिया, नाश्ता या अन्य खाद्य सामग्री बेचने वालों को दुकान किराए पर लेकर व्यवसाय करने को कहा गया है। इस आदेश से शहर में 1000 से 2000 छोटे व्यापारियों के सामने भविष्य अंधकारमय होता नजर आ रहा है। 20-25 हजार का किराया, आमदनी महज 10-15 हजार व्यापारियों ने बताया कि दुकान के लिए किराया 20,000 से 25,000 रुपये तक है, जबकि वे ठेले पर बैठकर मुश्किल से 10,000 से 15,000 रुपये महीने कमा पाते हैं। ऐसे में दुकान लेना आर्थिक रूप से असंभव है।छोटे व्यापारियों ने कहा कि वे सालों से मेहनत कर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं, और यह अचानक लिया गया निर्णय उनके लिए आजीविका पर सीधी मार है। स्वरोजगार पर चोट, व्यापारी बोले- प्रधानमंत्री भी आत्मनिर्भरता की बात करते हैं व्यापारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं स्वरोजगार को बढ़ावा देने की बात करते हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन का यह आदेश उनकी मेहनत पर पानी फेर रहा है। वर्तमान में पहले ही बेरोजगारी और महंगाई जैसी समस्याएं हैं, ऐसे में यह फैसला गरीब तबके पर दोहरी मार है। जिलाधीश को सौंपा ज्ञापन, वैकल्पिक व्यवस्था की मांग सैकड़ों ठेला व्यापारियों ने संयुक्त रूप से जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने निवेदन किया है कि जब तक प्रशासन कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करता, उन्हें ठेले पर व्यवसाय जारी रखने की अनुमति दी जाए। व्यापारियों का तर्क है कि शहर में कई स्थान ऐसे हैं जहाँ ठेले लगाने से यातायात या आम जनता को कोई असुविधा नहीं होती। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही समाधान नहीं निकाला गया, तो विरोध प्रदर्शन की भी नौबत आ सकती है। गरीबों के रोजगार पर संकट, उम्मीद है प्रशासन लेगा सकारात्मक फैसला व्यापारियों ने प्रशासन से संवेदनशील और व्यावहारिक निर्णय लेने की अपील की है, ताकि गरीब तबके को सम्मानपूर्वक आजीविका चलाने का मौका मिल सके। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन अब इस मुद्दे पर मानवता के आधार पर कोई राहत देता है या नहीं।

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सुरक्षा में बड़ी चूक! पहले युवक, फिर महिला ने की सलमान खान के अपार्टमेंट में घुसने की कोशिश

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चूक सामने आई है। भारी पुलिस सुरक्षा के बावजूद, दो अलग-अलग व्यक्तियों ने उनके घर में घुसने की कोशिश की। पहले एक युवक ने और फिर एक महिला ने मुंबई के गैलेक्सी अपार्टमेंट में जबरन प्रवेश की कोशिश की, जिसके बाद दोनों को पुलिस ने हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया। पहला मामला: छत्तीसगढ़ से आया युवक गाड़ी के पीछे छिपकर घुसा पुलिस के अनुसार, 20 मई की शाम को एक 23 वर्षीय युवक जितेंद्र कुमार सिंह, जो कि छत्तीसगढ़ का निवासी है, गैलेक्सी अपार्टमेंट में घुसने की कोशिश करते पकड़ा गया। वह एक निवासी की गाड़ी के पीछे छिपकर अंदर प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। सुरक्षा गार्डों ने उसे पकड़ लिया और बांद्रा पुलिस को सौंप दिया। जांच में पता चला कि वह युवक सलमान खान से मिलने आया था। उसने कहा कि जब उसे पुलिस ने मना किया तो वह छिपकर अंदर घुसने की योजना बना बैठा। पुलिस ने उसके खिलाफ BNS की धारा 329(1) के तहत मामला दर्ज किया है। दूसरा मामला: महिला ने लिफ्ट एरिया तक पहुंच बनाई इस घटना के महज दो दिन बाद, यानी 22 मई की सुबह करीब 3:30 बजे, 32 वर्षीय ईशा छाबड़ा नामक महिला ने भी सलमान खान के घर में घुसने की कोशिश की। वह गैलेक्सी अपार्टमेंट की सुरक्षा को पार करते हुए लिफ्ट एरिया तक पहुंच गई। सुरक्षा गार्डों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए महिला को रोका और बांद्रा पुलिस के हवाले कर दिया। अब इस मामले में भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। युवक का व्यवहार संदिग्ध, मोबाइल फोड़ा बांद्रा पुलिस के मुताबिक, घटना के दिन एक पुलिसकर्मी ने युवक को इमारत के बाहर संदिग्ध रूप से घूमते देखा और उसे जाने को कहा। लेकिन युवक ने गुस्से में आकर अपना मोबाइल जमीन पर पटककर तोड़ दिया। उसी दिन शाम को वह फिर लौट आया और अंदर घुसने की कोशिश की। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी और गार्डों ने मिलकर उसे तुरंत पकड़ लिया। पूछताछ में उसने कहा, “मैं सलमान खान से मिलना चाहता हूं लेकिन पुलिस मुझे अंदर नहीं जाने दे रही थी, इसलिए मैंने यह रास्ता अपनाया।” सलमान खान की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल गौरतलब है कि सलमान खान को पहले भी कई बार जान से मारने की धमकियां मिल चुकी हैं, और हाल ही में उनके घर के बाहर हुई फायरिंग की घटना के बाद उनकी सुरक्षा और भी कड़ी कर दी गई थी। इसके बावजूद दो लोगों का उनके घर तक पहुंच जाना मुंबई पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। निष्कर्ष: स्टारडम के साए में खतरे भी भारी यह घटना साफ दिखाती है कि बड़े सितारों के लिए महज फैंस ही नहीं, सुरक्षा भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। सलमान खान की लोकप्रियता जितनी ऊंची है, उतना ही गंभीर खतरा भी उनके आसपास मंडराता है। अब देखना यह होगा कि इन घटनाओं के बाद उनकी सुरक्षा में और क्या सख्ती लाई जाती है। 4o

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लॉन्चिंग के दौरान ही क्षतिग्रस्त हुआ उत्तर कोरिया का महाविध्वंसक युद्धपोत, अधिकारियों पर भड़के किम जोंग उन

सियोल/प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के नए और बेहद भारी विध्वंसक युद्धपोत का जलावतरण समारोह एक बड़े हादसे में बदल गया, जब यह समुद्र में उतरते ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया। देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन इस घटना से बेहद नाराज़ हो गए और उन्होंने इसके लिए सैन्य अधिकारियों, वैज्ञानिकों और शिपयार्ड प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। 5,000 टन वजनी युद्धपोत का जलावतरण समारोह बना हादसा उत्तर कोरियाई नौसेना के लिए तैयार किया गया यह नया 5,000 टन वजनी विध्वंसक युद्धपोत बुधवार को उत्तर-पूर्वी बंदरगाह चोंगजिन में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान समुद्र में उतारा जा रहा था। लेकिन लॉन्चिंग के समय पोत ‘रैंप’ से फिसल गया और फंस गया, जिससे उसका निचला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक, हादसे का कारण संतुलन बिगड़ना और तकनीकी खामियां थीं, जिससे युद्धपोत की संरचना को गहरा नुकसान पहुंचा। किम जोंग उन की सख्त प्रतिक्रिया – “यह आपराधिक लापरवाही है” हादसे के समय खुद किम जोंग उन समारोह में मौजूद थे। इस वजह से यह घटना उनके लिए एक बड़ी शर्मिंदगी का कारण बनी। किम ने इसे “गंभीर दुर्घटना और आपराधिक लापरवाही” बताया और कहा कि यह “वैज्ञानिक सोच की कमी” और “गैरजिम्मेदारी” का नतीजा है। उन्होंने तत्काल आपात बैठक बुलाई, जिसमें इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। जून के अंत तक होगी सत्तारूढ़ पार्टी की विशेष बैठक KCNA की रिपोर्ट के अनुसार, इस विषय पर चर्चा के लिए सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की केंद्रीय समिति की विशेष पूर्ण बैठक जून के अंत में बुलाई गई है। माना जा रहा है कि इसमें दोषियों के खिलाफ कठोर सजा और सिस्टम में व्यापक सुधार पर फैसला लिया जा सकता है। किम की नौसेना रणनीति को लगा झटका उत्तर कोरिया के लिए यह हादसा सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है, क्योंकि किम जोंग उन ने हाल ही में नौसेना को अपनी परमाणु सैन्य शक्ति का अभिन्न अंग घोषित किया था। इस नए युद्धपोत को उत्तर कोरिया के सागरीय प्रभुत्व की नई मिसाल के तौर पर पेश किया जा रहा था। दक्षिण कोरिया की सेना ने साधी चुप्पी इस हादसे पर दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय या सेना की तरफ से कोई तत्काल टिप्पणी नहीं आई है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह उत्तर कोरिया के सैन्य विकास कार्यक्रम की गंभीर कमजोरी को उजागर करता है। निष्कर्ष: तकनीक और तानाशाही की टकराहट उत्तर कोरिया के महाविध्वंसक युद्धपोत की लॉन्चिंग के दौरान हुई यह दुर्घटना इस बात की याद दिलाती है कि तानाशाही में वैज्ञानिक सोच और जवाबदेही किस तरह से दम तोड़ सकती है। किम जोंग उन के गुस्से और प्रतिक्रिया से यह साफ है कि उत्तर कोरिया के भीतर अब बड़ा सैन्य संकट खड़ा हो सकता है।

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बड़ी चेतावनी: “अगर आतंकवादी पाकिस्तान में हैं, तो उन्हें वहीं मारेंगे” – विदेश मंत्री एस. जयशंकर, ऑपरेशन सिंदूर जारी

नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक इंटरव्यू में आतंकवाद पर भारत की नीति को लेकर बेहद सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी भी जारी है और यदि आतंकवादियों ने फिर से भारत में हमला किया, तो उन्हें सीधे पाकिस्तान में मार गिराया जाएगा। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की कड़ी प्रतिक्रिया 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या के बाद भारत ने सख्त कार्रवाई की। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी। इसके जवाब में 7 मई को भारतीय सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoJK) में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। जयशंकर ने कहा कि भारत ने ऐसे आतंकवादी ठिकानों पर निशाना साधा, जिनके नाम संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध सूची में शामिल हैं। इनमें लश्कर, जैश-ए-मोहम्मद (JeM), और हिजबुल मुजाहिदीन (HM) जैसे संगठनों के ठिकाने थे। 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए, पाक सेना की बौखलाहट ऑपरेशन सिंदूर में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। इसके बाद पाकिस्तान ने एलओसी पर फायरिंग और सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन हमले करने की कोशिश की। भारत ने इसका जवाब देते हुए 8 पाकिस्तानी हवाई अड्डों पर हमला किया और उनके रडार, संचार केंद्र और रनवे को निष्क्रिय कर दिया। जयशंकर ने कहा, “हमने उनके हवाई अड्डों पर हमला करके उन्हें मजबूर किया कि वे गोलाबारी बंद करें। 10 मई को सीजफायर समझौता हुआ और दोनों पक्षों ने हमले रोकने पर सहमति जताई।” जयशंकर की दो टूक – “हम आतंकवादियों को मारेंगे” नीदरलैंड के एनओएस चैनल को दिए गए इंटरव्यू में जयशंकर ने कहा: “ऑपरेशन सिंदूर में एक स्पष्ट संदेश है – अगर आतंकवादी भारत पर हमला करते हैं, तो हम उन्हें मारेंगे, चाहे वे पाकिस्तान में हों। यह केवल गोलीबारी नहीं, बल्कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करने का अभियान है।” उन्होंने कहा कि भारत अब केवल आतंकवादी हमलों के बाद शोक नहीं मनाएगा, बल्कि ठोस जवाबी कार्रवाई करेगा। TRF, LeT और JeM जैसे संगठनों के कमांड सेंटर और संचालन ठिकानों को चिन्हित कर लिया गया है। संयुक्त राष्ट्र को पहले ही दी गई थी जानकारी जयशंकर ने खुलासा किया कि भारत ने 2023, 2024 और 2025 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को TRF के बारे में जानकारी दी थी और यह बताया था कि यह संगठन LeT से जुड़ा है। भारत के पास आतंकी ठिकानों की तस्वीरें, लोकेशन और ऑपरेटिंग मोड जैसी सूचनाएं हैं। निष्कर्ष: भारत की नीति – ज़ीरो टॉलरेंस एस. जयशंकर का बयान और ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई यह साफ दर्शाती है कि भारत की नई नीति में आतंकवाद के लिए कोई सहानुभूति या सहनशीलता नहीं है। भारत अब सिर्फ बचाव नहीं, बल्कि आक्रामक प्रतिरोध की नीति अपना रहा है – वह भी अंतरराष्ट्रीय नियमों और सूचनाओं के आधार पर। “अगर आतंकवादी पाकिस्तान में हैं, तो भारत उन्हें वहीं मारेगा” – यही है नया भारतीय दृष्टिकोण।

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बड़ा खुलासा: ISI का एजेंट निकला पाकिस्तान दूतावास में तैनात दानिश, दिल्ली में बैठकर कर रहा था जासूसी

भारत में जासूसी गतिविधियों को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। पाकिस्तान हाई कमीशन दिल्ली में तैनात रहा एहसान-उर-रहमान उर्फ दानिश, दरअसल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का एजेंट था, जो भारत में बैठकर जासूसी कर रहा था। गिरफ्तार यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के साथ दानिश के संबंधों के बाद जांच एजेंसियों को यह अहम जानकारी हाथ लगी है। दानिश का पासपोर्ट इस्लामाबाद से जारी हुआ था और वह वहीं पर ISI में कार्यरत था। 2022 में मिला था भारत का वीजा एजेंसी सूत्रों के अनुसार, दानिश को भारत का वीजा 21 जनवरी 2022 को जारी किया गया था। ISI अपने एजेंटों को अलग-अलग पदनामों के साथ दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन में तैनात करती है। ऐसे एजेंट वीजा लेने आने वाले भारतीय नागरिकों, खासकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, पत्रकार और कारोबारियों को हनी ट्रैप, ब्लैकमेलिंग, और पैसे के लालच के जरिए अपने जाल में फंसाते हैं और भारत विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करते हैं। ज्योति मल्होत्रा ने किया कबूल – दो बार गई पाकिस्तान, दानिश से संपर्क में थी जासूसी के आरोप में गिरफ्तार यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा ने पूछताछ में बताया है कि वह लगातार दानिश के संपर्क में थी। साल 2023 में पाकिस्तान वीजा के लिए जब वह पाकिस्तान हाई कमीशन दिल्ली गई थी, वहीं उसकी मुलाकात दानिश से हुई थी। बाद में उसने दानिश का मोबाइल नंबर लिया और बातचीत शुरू कर दी। ज्योति ने बताया कि दानिश के कहने पर वह दो बार पाकिस्तान गई और वहां पर अली हसन, शाकिर और राणा शहबाज जैसे सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों से मिली। अली हसन ने ज्योति के ठहरने और घूमने-फिरने का बंदोबस्त किया था।

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RCB ने प्लेऑफ से पहले चल दिया बड़ा दांव, धाकड़ बल्लेबाज टिम सीफर्ट को बनाया टीम का हिस्सा

आईपीएल 2025 के प्लेऑफ से पहले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए न्यूजीलैंड के विकेटकीपर बल्लेबाज टिम सीफर्ट को टीम में शामिल किया है। सीफर्ट को जैकब बेथेल की जगह स्क्वाड में जगह दी गई है, जो जल्द ही राष्ट्रीय कर्तव्यों के चलते इंग्लैंड लौट रहे हैं। रजत पाटीदार की कप्तानी में शानदार प्रदर्शन करते हुए RCB ने लीग स्टेज के 12 में से 8 मुकाबलों में जीत हासिल कर पहले ही प्लेऑफ के लिए क्वालिफाई कर लिया है। टीम की कोशिश अब टॉप-2 में स्थान बनाकर क्वालिफायर-1 में जगह बनाने की है। जैकब बेथेल की जगह टिम सीफर्ट आईपीएल के एक हफ्ते के सस्पेंशन के बाद 17 मई से मुकाबलों की फिर से शुरुआत हुई, जिसके बाद शेड्यूल में कई बदलाव किए गए। इसी दौरान कई विदेशी खिलाड़ियों की उपलब्धता पर भी असर पड़ा है। इंग्लैंड के जैकब बेथेल, जो लीग स्टेज के समापन के बाद अपनी राष्ट्रीय टीम के साथ जुड़ने के लिए रवाना होंगे, उनकी जगह टिम सीफर्ट को शामिल किया गया है। RCB ने सीफर्ट को 2 करोड़ रुपये में अपनी टीम का हिस्सा बनाया है। इससे पहले सीफर्ट दिल्ली कैपिटल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से भी आईपीएल खेल चुके हैं, हालांकि वहां उन्हें सीमित मौके मिले थे और उन्होंने तीन मैचों में कुल 26 रन बनाए थे। टी20 क्रिकेट में टिम सीफर्ट का धमाकेदार रिकॉर्ड टिम सीफर्ट का टी20 करियर बेहद शानदार रहा है। उन्होंने अब तक 262 टी20 मैचों में 5862 रन बनाए हैं। उनका औसत 27.65 और स्ट्राइक रेट 133.07 का रहा है। इसमें उनके नाम 3 शतक और 28 अर्धशतक दर्ज हैं। वर्तमान में सीफर्ट पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) में कराची किंग्स की तरफ से खेल रहे हैं और RCB के आखिरी लीग मुकाबले तक टीम से जुड़ने की संभावना है। RCB की रणनीति पर नजर प्लेऑफ से पहले टिम सीफर्ट जैसे अनुभवी और आक्रामक बल्लेबाज को टीम में शामिल करना RCB की रणनीतिक सूझबूझ को दर्शाता है। वह न सिर्फ विकेटकीपिंग में बैकअप विकल्प प्रदान करेंगे, बल्कि मिडल ऑर्डर में तगड़ी आक्रामकता भी ला सकते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सीफर्ट को प्लेइंग इलेवन में मौका मिलता है और क्या वह RCB को उनके पहले आईपीएल खिताब की ओर ले जा सकते हैं। 4o

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“यह भारत है, कन्नड़ नहीं बोलूंगी”: SBI मैनेजर के बयान पर बेंगलुरु में छिड़ा बड़ा विवाद, वीडियो वायरल

बेंगलुरु की एक एसबीआई (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) शाखा में कन्नड़ भाषा को लेकर एक विवाद ने तूल पकड़ लिया है, जहां एक महिला बैंक मैनेजर द्वारा कन्नड़ में बात करने से इनकार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस घटना के बाद भाषाई अस्मिता और संवेदनशीलता को लेकर राज्यभर में बहस छिड़ गई है। क्या है पूरा मामला? बेंगलुरु स्थित एसबीआई की सूर्य नगर शाखा में एक ग्राहक ने बैंक मैनेजर से कन्नड़ में बात करने की अपील की, जिस पर महिला अधिकारी ने कहा, “यह भारत है, मैं कन्नड़ नहीं बोलूंगी, मेरी मातृभाषा हिंदी है।” इस जवाब पर ग्राहक ने आपत्ति जताई और पूरी घटना को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया। वीडियो वायरल होते ही कई यूज़र्स ने बैंक अधिकारियों पर कन्नड़ भाषा का अपमान करने और हिंदी थोपने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया पर भड़की प्रतिक्रिया एक यूज़र ने लिखा, “एसबीआई शाखा मैनेजर और स्टाफ कन्नड़ भाषा का अपमान कर रहे हैं। कर्नाटक के लोगों पर हिंदी थोप रहे हैं। ग्राहकों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं।” इस तरह की कई प्रतिक्रियाओं के चलते यह मुद्दा राजनीतिक बहस में बदल गया और उत्तर-दक्षिण भारत के भाषाई मतभेद का विषय बन गया। महिला अधिकारी ने मांगी माफ़ी विवाद बढ़ने के बाद संबंधित महिला अधिकारी ने एक माफ़ी वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने शब्दों पर खेद जताया। हालांकि तब तक मामला काफी तूल पकड़ चुका था। एसबीआई और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की प्रतिक्रिया एसबीआई ने इस घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हम सूर्य नगर शाखा में हाल ही में हुई घटना से चिंतित हैं। इस मामले की गहन जांच की जा रही है। भारतीय स्टेट बैंक, ग्राहकों की भावनाओं को प्रभावित करने वाले किसी भी व्यवहार के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति रखता है।” कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी इस मामले पर बयान जारी कर कहा, “एसबीआई शाखा मैनेजर का कन्नड़ और अंग्रेज़ी बोलने से इनकार और नागरिकों के प्रति असम्मानजनक व्यवहार की कड़ी निंदा की जाती है।”उन्होंने एसबीआई को त्वरित कार्रवाई के लिए धन्यवाद देते हुए बताया कि अधिकारी का तबादला कर दिया गया है। भाषा विवाद क्यों बना बड़ा मुद्दा? यह विवाद सिर्फ एक संवाद की असहमति नहीं है, बल्कि भाषाई पहचान और सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा हुआ मुद्दा बन गया है। कर्नाटक में कन्नड़ भाषा को राजकीय भाषा का दर्जा प्राप्त है और नागरिकों की यह अपेक्षा रहती है कि सरकारी सेवाओं में इस भाषा का सम्मान हो। दूसरी ओर, कुछ लोगों का मानना है कि भारत एक बहुभाषी देश है और हर नागरिक के लिए सभी क्षेत्रीय भाषाएं सीखना व्यावहारिक नहीं है। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संवेदनशील प्रशासनिक पदों पर तैनात अधिकारियों को क्षेत्रीय भाषाओं की जानकारी और संवेदना होना कितना जरूरी है। यह मामला सिर्फ बेंगलुरु तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे देश में एक भाषाई बहस को जन्म दे चुका है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि एसबीआई और अन्य सरकारी संस्थान क्षेत्रीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए आगे किस प्रकार कदम उठाते हैं।

Chhattisgarh News, Raipur

छत्तीसगढ़ में पुलिस ने किया 26 माओवादियों के मारे जाने का दावा, नारायणपुर में चला 50 घंटे का सर्च ऑपरेशन

छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित नारायणपुर जिले से बड़ी खबर सामने आई है, जहां पुलिस ने एक भीषण मुठभेड़ में 26 माओवादियों के मारे जाने का दावा किया है। राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने बुधवार को इस ऑपरेशन की जानकारी देते हुए बताया कि ओरछा इलाके में पिछले 50 घंटों से सर्च अभियान चल रहा था, जिसके तहत यह मुठभेड़ हुई। गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, “इस ऑपरेशन में 26 से अधिक माओवादी मारे गए हैं। जानकारी मिल रही है कि इनमें से कुछ वरिष्ठ कैडर के माओवादी भी शामिल हैं।” उन्होंने यह भी संकेत दिए कि मारे जाने वाले माओवादियों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। उन्होंने राज्य सरकार की मंशा दोहराते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को ‘लाल आतंक से मुक्त’ कराने के लिए सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पिछले 15 महीनों में 400 से अधिक माओवादी मारे गए राज्य में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा बलों ने बीते 15 महीनों में लगातार सघन ऑपरेशन चलाए हैं। इन कार्रवाइयों में अब तक 400 से अधिक संदिग्ध माओवादी मारे जा चुके हैं। यह मुठभेड़ उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों को सुरक्षित किया जा रहा है। केंद्र सरकार का लक्ष्य: 2026 तक माओवाद का अंत गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि भारत को 31 मार्च 2026 तक माओवादी आतंक से मुक्त कर दिया जाएगा। इसी दिशा में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर लगातार सुरक्षा बलों की तैनाती और अभियानों को तेज कर रहे हैं। क्या है आगे की रणनीति? सुरक्षा बलों के अनुसार, सर्च ऑपरेशन जारी है और मुठभेड़ स्थल से अस्त्र-शस्त्र और गोला-बारूद भी बरामद किए गए हैं। इस ऑपरेशन को सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब माओवादी गतिविधियां फिर से सक्रिय होने की कोशिश कर रही थीं। छत्तीसगढ़ में माओवादी समस्या वर्षों से एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन हालिया कार्रवाइयों से यह संकेत मिल रहा है कि राज्य सरकार अब निर्णायक लड़ाई की ओर बढ़ रही है।

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